दिल्ली वालों की कृपा से ऋषिकेश में आत्मा आपसे वार्तालाप कर सकती है
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ. ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ ... पहला वाक्य पढ़कर आप हैरान हो रहे होंगे। ऐसे कैसे संभव है कि आत्मा आपसे बात कर ले। हां, मेडिटेशन करते हुए आप जरूर अंदर झांककर आत्मा से कुछ चर्चा-वर्चा कर लेते होंगे। आत्मा ही बाहर निकलकर आपसे रूबरू हो जाए तो आप क्या करेंगे। इस रहस्य से कुछ मिनट में ही पर्दा उठाएंगे। आप ऋषिकेश की यात्रा पर आगे बढ़ते जाइये। गाइड मूवी का एक डॉयलॉग है न सुख है न दुख है न दीन है न दुनिया न इंसान न भगवान सिर्फ मैं हूं मैं हूं मैं हूं मैं हूं सिर्फ मैं इसी दर्शन के साथ नौ नौजवान (उम्र पर मत जाइये) रिषिकेश यात्रा पर रवाना हुए। दो गाडि़यां। चूंकि रवि धवन का आग्रह रहता है कि कोई अपशब्द नहीं बोलेगा। इन दो दिनों के लिए इन आठ नौजवानों ने विशेष छूट की स्वीकृति करवा ली थी। पर ये स्वीकृति होते हुए भी पांच नौजवानों ने तय किया कि वे अलग गाड़ी में बैठेंगे, जहां वे बादलों को नीचे ला सकें। आप समझ गए होंगे। गाड़ी को धुएं से भर सकें। ब्लैकडॉग सोमरस लेते स...